सहस्रजित्


          गजेन्द्र ठाकुर
गजेन्द्र ठाकुर, पिता-स्वर्गीय कृपानन्द ठाकुर, माता-श्रीमती लक्ष्मी ठाकुर, जन्म-स्थान-भागलपुर ३० मार्च १९७१ ई., मूल-गाम-मेंहथ, भाया-झंझारपुर,जिला-मधुबनी।

लेखन: कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सात खण्ड- खण्ड-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना, खण्ड-२ उपन्यास-(सहस्रबाढ़नि), खण्ड-३ पद्य-संग्रह-(सहस्त्राब्दीक चौपड़पर), खण्ड-४ कथा-गल्प संग्रह (गल्प गुच्छ), खण्ड-५ नाटक-(संकर्षण), खण्ड-६ महाकाव्य- (१. त्वञ्चाहञ्च आ २. असञ्जाति मन ), खण्ड-७ बालमंडली किशोर-जगत कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नामसँ।

मैथिली-अंग्रेजी अंग्रेजी-मैथिली शब्दकोशक ऑन लाइन आ प्रिंट संस्करणक सम्मिलित रूपेँ निर्माण। पञ्जी-प्रबन्धक सम्मिलित रूपेँ लेखन-शोध-सम्पादन आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यंतरण "जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी. सँ २००९ ए.डी.)-मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध" नामसँ।

मैथिलीसँ अंग्रेजीमे कएक टा कथा-कविताक अनुवाद आ कन्नड़, तेलुगु, गुजराती आ ओड़ियासँ अंग्रेजीक माध्यमसँ कएक टा कथा-कविताक मैथिलीमे अनुवाद।

उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) क अनुवाद १.अंग्रेजी ( द कॉमेट नामसँ), २.कोंकणी, ३.कन्नड़ आ ४.संस्कृतमे कएल गेल अछि; आ एहि उपन्यासक अनुवाद ५.मराठी आ ६.तुलुमे कएल जा रहल अछि, संगहि एहि उपन्यास सहस्रबाढ़निक मूल मैथिलीक ब्रेल संस्करण (मैथिलीक पहिल ब्रेल पुस्तक) सेहो उपलब्ध अछि।

कथा-संग्रह(गल्प-गुच्छ) क अनुवाद संस्कृतमे।

अंतर्जाल लेल तिरहुता आ कैथी यूनीकोडक विकासमे योगदान आ मैथिलीभाषामे अंतर्जाल आ संगणकक शब्दावलीक विकास।
शीघ्र प्रकाश्य रचना सभ:-१.कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सात खण्डक बाद गजेन्द्र ठाकुरक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक-२ खण्ड-८ (प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना-२) क संग, २.सहस्रबाढ़नि क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर उपन्यास स॒हस्र॑ शीर्षा॒ , ३.सहस्राब्दीक चौपड़पर क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर पद्य-संग्रह स॑हस्रजित् ,४.गल्प गुच्छ क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर कथा-गल्प संग्रह शब्दशास्त्रम् ,५.संकर्षण क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर नाटक उल्कामुख ,६. त्वञ्चाहञ्च असञ्जाति मन क बाद गजेन्द्र ठाकुरक तेसर गीत-प्रबन्ध नाराश‍ं॒सी , ७. नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक तीनटा नाटक- जलोदीप, ८.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक पद्य संग्रह- बाङक बङौरा , ९.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक खिस्सा-पिहानी संग्रह- अक्षरमुष्टिका ।
सम्पादन: अन्तर्जालपर  विदेह ई-पत्रिका “विदेह” ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/ क सम्पादक  जे आब प्रिंटमे (देवनागरी आ तिरहुतामे) सेहो मैथिली साहित्य आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि- विदेह: सदेह:१:२:३:४ (देवनागरी आ तिरहुता)
ई-पत्र संकेत- ggajendra@gmail.com
कान रहित घैल- मोइट
इकरी

२१
खील एक सालक खजूरक गाछ
नहि भेटत हमरा गाममे खजूरक गाछ
खीलकेँ गर्दनि लग छिललापर खिलकट्टी
पौ- तीन सालक रस चुअयबा योग्य गाछ
एक सालक ताड़क गाछ- खगड़ा तीन सालक जोता
डल्ली डंटी सहित पात ताड़ आ खजूरक
तारक डंटीबला डल्लीक भाग- डमखोरा आ पातबला- छाजा
उपरका भागसँ नव पातक अंकुर फुटैत छैक- बीड़ कलगी
गोभा खोआ बीड़क लगबला मोलाएम भाग
बीएड़ ओ ओकर चारूभाग पातक समूह- मौड़
ताड़-खजूरक गाछी- बगात
खजूरक बोन- खजुरबन्नी
डड़कसपर ओंङठल पासीक शरीर गाछ छिलबा काल
महालीपर कपड़ाक छनान मुँह बान्हने रहैत अछि
माटिक कटियामे ताड़ी पिबैत
सभसँ छोट नपना- गुड़की
दुन्ना गुड़की- अधचौठी
दुन्ना अधचौठी- घचक्का
चारि चौठी- घैली/ बेचाढ़ी
नाम आकृतिक घैली- दोकानी बम्मा
छेबब गहींर कटोरी जेकाँ छेबब गरदनिपर
फेर तेसरा दिनपर पातर-पातर परत पृथक करब- पहटब
छीलल भागक निचला भागमे जीहक आकृतिक बनाबटि- जिभिया
पसीखाना पी ऑफिस आकि पी.एन.कॉलेज
पासीक चिड़ै पकड़बाक हसेल जाल
इच्छा जीतत आकि जीतत ईर्ष्या
संकल्प हमर जे एहि धारकेँ मोड़ि देब
मुदा किछु ईर्ष्या अछि सोझाँ अबैत
ईर्ष्या जे हम धारकेँ नहि मोड़ि पाबी
बहैत रहए ओ ओहिना
ओहिना किए ओहूसँ भयंकर बनि

संकल्प जे हम केने छी
इच्छा जे अछि हमर/ से हारि जाए
आ जीति जाए द्वेष/ जीति जाए ईर्ष्या
हा हारबो करी तेना भऽ कऽ जे लोक देखए!/ जामा देखए!!
तेना कऽ हारए संकल्प हमर/ इच्छा हमर
धारकेँ रोकि देबाक/ ठाढ़ भऽ जएबाक सोझाँ ओकर
आ मोड़ि देबाक संकल्प ओहि भयंकर उदण्ड धारकेँ
मुदा किछु आर ईर्ष्या अछि सोझाँ अबैत
ओ द्वेष चाहैए जे हमर प्रयास/ धारकेँ मोड़बाक प्रयास
मोड़लाक प्रयासक बाद भऽ जाए धार आर भयंकर
पुरान लीखपर चलैत रहए भऽ आर अत्याचारी
आ हम जाए हारि
आ हारी तेना भऽ कऽ जे लोक राखए मोन
जे कियो दुस्साहसी ठाढ़ भऽ गेल छल धारक सोझाँ
तकर भेल ई परिणाम
जे लोक डरा कऽ नहि करए फेर दुस्साहस
दुस्साहस ठाढ़ हेबाक उदण्ड-अत्याचारी धारक सोझाँमे
लऽ ली हम पतनुकान/ से सुनि थरथरी पैसि जाए लोकक हृदयमे

मुदा हम हँसै छी
हारि तँ जाएब हम मुदा हमर साधनासँ जे रक्तबीज खसत
से एक-एकटा ठोपक बीआ बनि जाएत सहस्रबाढ़नि झोँटाबला
धारकेँ रोकबाक हिस्सक जकरा लागि गेल छै
मैथिली-विरोधी धारक विरुद्ध ठोकि कऽ ताल भऽ जाएत ठाढ़
आ डरा जाएत द्वेष स्म्रण कऽ
जे फेर रक्तबीजसँ निकलल एहि सहस्रबाढ़नि सभक रक्तबीज
एकर सभक बीआक सन्तान फेर आर बढ़ि जाएत आक्रमणसँ
कारण संकल्प अछि इच्छा अछि ई सभ
धारकेँ रोकबाक हिस्सक जकरा लागि गेल छै
फैसला हेतै आब
उनटि जाइए लोक
उनटि जाइ छै बोल
छने-छन बदलि जाइए
बिचकाबैए ठोर
बोलक मधुर
बनि जाइए बिखाह
घड़ी पूजा
ऐँ यौ,
अहूँ सभमे होइए घड़ी पूजा
ई तँ होइ छै छोटका लोक सभमे
अगस्त १८ २०१० केँ छै घड़ी पूजा एहि बेर
धर्मराजक भगवती घरमे
खा कऽ हाथ धो कऽ गारि दै छिऐ,
नहि किछु बहराएत बाहर
सर्जनक सुख भेटत चोरिमे?
दोसराक कृति अपना नाम केलासँ
आकि दोसराक मेहनतिकेँ अपन नाम देलासँ
दोसराक प्रतिभाकेँ दबा कऽ
कुटीचालि कऽ आर
भाँग पीबि घूर तर कऽ गोलौसी
कोनाकेँ आँगुर काटब जे लिखब बन्न करत
तोड़ि दियौ डाँर
काटि दियौ पएर
आँखि निकालि लिअ धऽ दियौ रॉलर नीचाँमे
पिसीमाल उठा दियौ
बड़का एलाहेँ सर्जनक सुख पएबाले
१.नजरि लागि जाइ छै
माए कहै छथि
जे नजरि लागि जाइ छै
बेटाकेँ देखि जे लागैए ओ आइ सुन्दर
साँझमे छाह पड़ि जाइ छै ओकर मुँहपर
से तँ सत्ते! हमरा सन ककर बेटा
मुदा मोनमे ई अबिते नजरि लागि जाइ छै

कोनो काज शुरू करैए
मारिते रास काज एक्के बेर
खतम होएबा धरि सुधि नहि रहै छै
कियो कहैए जे कतेक नीक अछि अहाँक बेटा
तँ माएक करेज धकसँ रहि जाइत छै
करेज बैसऽ लगै छै
की करै छै?
कोन सुन्दर छै?
मुदा कहैत रहै छथि माए
जे नजरि लागि जाइ छै
बाते-बातपर हमर बेटाकेँ
कनिञा कहैत छथि सासुकेँ
माँ अहाँक बेटा घबराइ बला नहि अछि
दुष्टक नजरि नहि लगै छै अहाँक बेटाकेँ

माए मुदा शनि दिन, सरिसौ-तोरी आ मेरचाइ जड़बैत छथि
सुरसुरी लागि जेतै ओकरा तँ बुझब जे नजरि नञि लागल छै
आ सुरसुरी जे नञि लागतै तँ बुझब जे नजरि लागि जाइ छै

कनेक काल सुरसुरी नञि लगलापर माए होइत छथि चिन्तित
देखियौ ने हमरा बेटाकेँ नजरि लागि छै छोटो-छोट गपपर..
नजरि लागि जाइ छै...बाते-बातपर हमर बेटाकेँ...
मुदा तखने छिकैत छन्हि बेटा, ओकरा सुरसुरी लागि जाइ छै
माएक मुँहपर अबै छन्हि मुस्की
सरिसौ-तोरी आ मेरचाइ सरबामे कनेक आर दऽ दै छथि...
कहलियन्हि ने माँ दुष्टक नजरि नहि लगै छै अहाँक बेटाकेँ

२.ठाढ़ लत्तीकेँ पढ़ैत छी

पानक जड़ि लग गारल खरही देखैत छी
आ ओहिपर ठाढ़ लत्तीकेँ पढ़ैत छी
राड़ी घासक टुकड़ी आ काइससँ बान्हल हमर उल्लास
सरपत घासक टुकड़ीपर चढ़ि गेल लत्ती जेकाँ
लत्ती जेकाँ हम अपनाकेँ पबैत छी

बन्हकासँ बान्हल पानक ढोल बनि गेल छी
मोड़ल पानकेँ सीकीसँ,
बाँसक पातर शलाकासँ गाँथल अछि
बेल निकलल शाखा कनार,
इकरीसँ गछउठौनी
पानक छर्रा लत्ती, गीरहसँ युक्त छर्रा बेल बनि गेल छी
लत्तीक छीपकेँ काटब, छपटा करब
जड़ि लगक चारि-पाँचटा पानक पात माने घासन जेकाँ
ऊपर चारि-पाँचटा पानक पात माने कूट-खूट कचलेवारि होइत
छीप परक पात मुड़वारि भऽ गेल छी

पात तोड़बाकाल कूटक एक-दूटा पात तज्जीबला कठोर पात
किछु काल लेल छोड़ि देल
जड़िसँ छीप धरि दुपन्ना आ लेवार सभ
झलमा बीमारी भेने पान कड़ू भेल
फुट्टा बीमारी भेने गलल पात सन हम असकरे घुमैत छी
तुबैत, तेलगगरा भेने आ झरकैत; बढ़ती भेने अग्रभाग झरैत
पातकेँ फेरफार कऽ मृत्युकेँ टारैत छी किछु काल धरि, बहुती!



चौठैय्या, ढोली, लेसो, भीड़ा बनि गेल छी
पातमे बान्हल भीड़ी, से पतौरा जेकाँ तैयार भेल कल्लामे जएबा लेल धड़फड़ाइत
डंटी लागल सौँस छुट्टा पान सन पूजा लेल निहुछल
तबक सन चमकैत पन्नीमे ठूसल बजारक समान बनि गेल छी
आ तखन
पानक जड़ि लग गारल खरही देखैत छी
आ ओहिपर ठाढ़ लत्तीकेँ पढ़ैत छी











३.हमर आकांक्षाक अग्नि- गजेन्द्र ठाकुर

आँचब आ प्रज्वलित राखब, हम्हरब आगिकेँ
खोरनाठब मुदा, तखन आगि खसत पातक ढेरीपर
आ पसाही लागत
हमर आकांक्षाक अग्निकेँ

मखान उठबैत छलहुँ पेलनीसँ
गूड़ीसँ चोंइटा हटबैत छलहुँ
बाङक बङौरा, सुखाएल अछि केहन ई बङठी
औंटि कऽ निकाली बङोर,
तुमब आ फाहाक पृथक होएब, धुनकीसँ धूनैत छलहुँ
लारनिसँ ताँतिपर कऽ आघात, मखान उठबैत रही पेलनीसँ
गूड़ीसँ चोंइटा हटबैत रही, रही टकुरी कटैत, मड़िएबैत छिन्नाकेँ
पागैत सूत, छल ई हमर आकांक्षाक अग्नि

ननगिलाट पहिरने बूढ़ी, सोझाँ नन्हसुतमे मलकिनी
कलबत्तू पइसा कऽ गाँथैत आभूषण मोन अछि
किरमिची चानीक पानि चढ़ल, मुदा वैह ताम
आब हमर आकांक्षाक अग्नि माँगैत अछि
पाग नहि चाही हमरा मौड़
शंकुक आकारक पैघ,
कोढ़िलायुक्त पागक अग्रभागक पेंच नहि
आब हमर आकांक्षाक अग्नि माँगैत अछि
चिरतन, ठिकरी, लहेरिया आ जंगलाती छाप
आब हमर आकांक्षाक अग्नि माँगैत अछि
पटोर, गुलबदना, नीलाम्बरी, सोइरीक नूआ
कलफ लगा कए कड़गर कए, भेलासँ दऽ चेन्हासी
तूरक फाहा, पोखरिया, लहेरिया, बदामी, चानपंखा
बेराएब आ सुइया पैसाएब अहाँ
हमर आकांक्षाक अग्निकेँ
लखिया भेड़ जेकाँ आगाँ-आगाँ
बथनिञाक बथनाएब अबैत काल, आ खभाएब जाइत काल
बीसटा भेड़क लेहड़, एक सए भेड़क बाग
चारि-पाँच सए भेड़क गँहेड़,
भेड़केँ खउरब, गुलठिआइत तूर
सिऐन अधलाह, खुटिया मिरजइ ओछ
हमर आकांक्षाक अग्नि करत
ई पुरान लोहझाम, लोहङ्गरकेँ
भाथीमे पैसैत वायु जखन आएत तखन
भाथी सालब आ प्रज्वलित करब अग्नि
लऽ कलम छेनी, चकरसानपर पिजबैत सरौता
हमर आकांक्षाक अग्नि सुनैत अछि
कबिराहाक कनसीपर उठैत धुन
देखैत अछि, छिलुआ पहलदार बासन
आ तखन हम
आघातसँ मठारब पित्तरि, कलगैञा लोटा
निरंजनीक दीप, जलधरी
फेर दीयठिमे राखि दीप
पहिरि टुमटाम गहना, गोबरियाव सोन, जोकठी आ दसकलम
चाँपकली पहिरने ओ लेने छलि हलुमानी नातीक लेल
पथरौटी पहिरि हम, पवित्री जनउमे बान्हि
श्राद्धक काञ्चनपुरुष जेकाँ
आकांक्षाक अग्नि हृदयमे लऽ
कनसारीक भुज्जा जेकाँ
दाबापर उझकुन ओहिपर राखल बासनमे
चुल्हाक पौरी कूरामे धिपाओल बालु दऽ
भुजनाठीसँ लाड़ैत छी
अपन आकांक्षाक अग्नि
मकइक मखानी
सोन्हगर आ झूर नीक स्वाद
मुदा आब अतिखाइन होइत अछि
हमर आकांक्षाक अग्नि

अदहन देल पानि आँच दए तारब
उसीनब कूटि कऽ मुरहीक चाउर बनाएब
नोन-पानिसँ मोअब कोड़ाइ, दालिक खोंइचा

बिनु जमल गुड़ छाल्हीक पातर ममुरी
परतपरसँ काछि कऽ निकालब मलीदा
तेबासि नीक , मुदा बसियानि
मोटगर भैसाठ आ पातर तुर्री दही
आकांक्षाक अग्निकेँ जरैत रहए देब
ओहिना जेना कोइयासँ तेल निकालैत छी।
मोहब आ दऽ आएब तेलिहानी
तेलीकेँ दऽ बहतौनी, घानी लगाएब आ निकलब धेनुआर घानी
घानी निघरब, तेलहनक अवशेष खरी
उज्जर रंगक रेह
नोनथरा, कोठीसँ निकलल
पनारसँ चुबैत पानि, अवशिष्ट सिट्ठी ढेर नोनफर
काछल फेन खारीसँ खरिआ नोन
हमर आकांक्षाक अग्नि सुच्चा
फेर अवशिष्ट पछाड़ी, दोसर खेपमे काही शोरा
आ पकवा नोन, तेसर खेप तेलहा शोरा
आ नीमक अवशिष्ट जराठी
जराठी आ सिट्ठीक मिश्रण
बेचुआ, रौदमे सुखा कऽ जरुआ शोरा-आबी शोरा
कच्चा शोरा परिशुद्ध भऽ कलमी शोरा
नोन- रामरस, कम नोनगर- मधनोन
कटियामे मधु राखि
चिड़ै मारबा लेल नर-सर
नाल गुआमे पैसल, नरक उपरका सिर आ नीचाँ भारू
सरमे कमची सभ, पकड़बा लेल चिड़ै कम्पा
मन्तुर पढ़ि छत्ता लग जाएब,
तुनकारी दऽ बिज्जीक करैत अछि शिकार
ई हमर आकांक्षाक अग्नि
आँचब आ प्रज्वलित राखब
मुदा हम्हरब आगिकेँ
खोरनाठब मुदा
आगिक खसब पातक ढेरीपर
आ पसाही लागत
मुदा ई
हमर आकांक्षाक अग्निकेँ तँ जरैत रहए देत









४.उजाहिमे उपलाइत हम आ माँछ

ई नम्माधग्गी
बिड़इमे होइत मछहर
डकही पोखरिमे भऽ गेल बन्न,
डकही पोखरि मखानक पातसँ छाड़ल अछि आब
मुदा एतऽ बिड़इमे होइत अछि मछहर
कच्छाछोप, हेलैत कबइ
काही घुमैत
कौआठुट्ठी गाछक फड़ लग हम ठाढ़
कबइजल्ला लग
आ हम आबि जाइत छी
खींचि फिरचइ पकड़ि कऽ
छी जाल खिरबैत
आ फेर हम घुरमऽ लगै छी
फेर टापी छापि,
ठाढ़ भऽ जाइ छी
छै उजाहिमे उपलाइत माँछ
आ फेर हम जाल छोड़ि दैत छी
सहदसँ माछक करै छी शिकार
आ आब
अछि इछाइन चारू कात
जाल खिरबैत
घुरमा लागि जाइत अछि
सोचनी पैसि जाइत अछि
इछाइन गन्ध बनि जाइत अछि नियति
जीवनक प्रवृत्ति
माँछ संगे उपलाय लगैत छी
लगैए जाल खिरबैत हमरा बान्हि कियो रहल अछि
लगैए शहद लेने छातीमे कियो ढुकल जा रहल अछि।
सोचनी पैसि जाइत अछि
इछाइन गन्ध बनि जाएत की हमर नियति
हमर जीवनक प्रवृत्ति
ई नम्माधग्गी


५.बकछुछरु खेलाइत हम आ भीखू

बँसकरमक विश्वकर्मा
भीखूक फारब आ
ओदारि कऽ निकालब
उजरा औषधि वंशलोचन
कोनिञा सूप हकरा पथिया
मुदा खजुरिया बान्हमे बान्हल
हमर आ ओकर वर्तमान आ भविष्य

बकछुछरु खेलाइत हम आ भीखू
डोमासीक कातबला पोखरिक महारपर
थुथुन घोसियेने माँटिमे सुगरक झुण्ड
भीखूक भाए छथि आब सरकारी अधिकारी
दोसर भाए हॉस्पीटलक वार्डबॉय
आ भीखू एखनो डोमासीमे
जिबैत वर्तमानक संग भविष्यक ताकिमे

स्थिर ओहिठाम ठाढ़,
मुन्हारि साँझमे लीलीडाली हाथमे लेने
बजैत जे भाए बनल अछि अधिकारी
मुदा गाम छुटले छै बुझू
बियाहो पैघ घरमे ओकर भेल छै
दोसर भाए तँ गाम अबिते अछि
ओढ़ना पहिरना नीक मुदा काज वएह
हमरे नहि फुराइए करू की?
भविष्य तँ वएह बुझाइत अछि।

आगाँ अहाँ अएलहुँ, कोन काज कहू ?
मुँह झलकि गेलै भीखूक
ओहि मुन्हारि साँझमे

हम चुप्पे रही तावत्
ओहि झण्डी ठाढ़ गाछ लग
ठाढ़ गाछ कुकाठ लग
बाजि उठल भीखू मुदा काज तँ
काज तँ हमर ओ हाकिम भाए नहिए करत
मुदा अहाँले कहबै धरि अबस्से।

आ हम कहैत छी, नहि भीखू
हाकिम तँ काज कइये देत
मुदा काज अछि हॉस्पीटलक
पिता छथि भरती जतए भाए अहाँक छथि काज करैत।
कतेक दिन भेलन्हि भरती भेना
मुदा नहि आइ काल्हि होइत
ऑपरेशनक तिथि अछि बढ़ेने जाइत
आ भीखूक मुँह झलकि उठल
मुन्हारि साँझमे।

हँ कहबामे जे होइत छै संतुष्टि
मदति देबामे जे होइत छै आत्मतृप्ति
ताहिसँ।
बँसकरमक विश्वकर्मा भीखूक वंशलोचनसँ
तृप्त होइत छी हम सेहो।
ओहि मुन्हारि साँझमे


६.आकाश मध्य लिखल हमर लेख
कागजपर लिखल क्यो पढ़त
क्यो नहि
मुदा ओतए जे उठाओत आँखि
देखत अंगैठी-मोड़ करैत
उठैत भुजाक स्पर्शसँ करत अनुभव
जे विश्वक समाप्ति होएत
किछु लोक बचत
तखन करब कोन काज
कार्यालयक तँ कोनो काज बाँचत नहि
ने कंप्युटर ने अन्तर्जाल
सुन्न चारू कात
ने लूरि खेती करबाक हमरा
कागत रंगबाक लेल रोशनाइ नहि
वादक सम्बल अर्थहीन
विकराल राति सोझाँ ठाढ़
गरजैत मेघ रौद्र
मेघमे विद्युत
वृत्रहन्ता इन्द्र चीरैत छथि मेघ
कवष ऐलूषक ऋक्
शूद्र कवि हमर
विद्युत् प्रकाशसँ प्रकाशित मेघक शक्तिपात्
शरीरक मध्य हजारक-हजार धार
रक्तक प्रवाहक साँपसन टेढ़-मेढ़ चालि
हमर मोन दौगि रहल
एहि अन्तर्मनक धारक बीच
ओहि बहिर्जगतक विद्युतसँ तीव्र
चतुष्पात् पुरुष वा ब्रह्म
मुदा एकपाद ई जगत्
अन्तर्मनक प्रचोदयिता
आसुरी वृत्र आ राक्षसी पणि
शारीरिक धार संचार तन्त्र
चलू समुद्र दिस हमर नाड़ीतंत्र आ एकर
लहरिमे डूमैत-उगैत
अपन भोगल यथार्थसँ बहार कएलहुँ मधु 
आहुति देबा लेल ओहि समुद्रमे
आ तखने शरीरक नदी-धार
लहरिमे डुमैत करैत अछि आनन्दित
जागरित मोनसँ निकसैत वाणी
पीपड़क पातक नाड़ीतंत्र सन
इला-सरस्वती आ भारती छथि
विद्युत् बाल लेल भोजनक इन्तजाम करैत
ज्योतिक हम साधक
सन्दीपनकूट हुअए लावण्यमय
सहस्रशाख विद्युत् हिरण्यमयी
सहस्रजित् अजस्र अन्तर्मुखी
ऋतं बृहत्









आ ओतहि खापमे माँछक अंडा
फ्राइ
जीरा सेहो
थइरमे छबराक संग माँछ
अमच्छ डबरा, मेहनतिक अपव्यय
जोह धारक दिशाक
मुदा अबार धारकेँ मारि फेकैत
माँछ
घुट्ठी भरि पानिमे चाँछ
आ ओहिपर चढ़ब धारक विरुद्ध
चालि दैत ई माँछ

खेधा-पौटी नाहक माङीपर बैसि
खसबैत बसेर जाल
आ हम दोसर माङीपर बैसिखेबैत छी ओहि जालकेँ दिशा निर्दिष्ट भऽ
कन्हेर करैत
जालक चारूकात
ठकठकिया करैत
अनैत माँछकेँ जाल दिस
पलइ आ पिठकट
बेच दऽ कीनल माँछ
लावा-दुआ, ठेङी
धोबिया चिड़ै, मछगिद्दी
औकामे गूड़ी सभ उठा
अएलहुँ ऊपर

3
आकाश मध्य लिखल हमर लेख
कागजपर लिखल क्यो पढ़त
क्यो नहि
मुदा ओतए जे उठाओत आँखि देखत
अंगैठी-मोड़ करैत उठैत भुजाक स्पर्शसँ
करत अनुभव

जे विश्वक समाप्ति होएत
किछु लोक बचत
तखन करब कोन काज
कार्यालयक तँ कोनो काज बचत नहि
ने कंप्युटर ने अन्तर्जाल
सुन्न चारू कात
ने लूरि खेती करबाक हमरा
कागत रंगबाक लेल रोशनाइ नहि
वादक सम्बल अर्थहीन
विकराल राति सोझाँ ठाढ़
भालसरिक गाछ
अछि ककर ई
सड़कऽ कात
माटि भरलापर
भऽ जाइत अछि धोधरि ठाढ़िमे
नहि जड़िमे

आ सेहो आबि गेल सड़कपर
आब ई गामक नहि
भऽ गेल अछि सरकारी
एहि बँसकरमक विश्वकर्मा
भीखूक फारब आ
ओदारि कऽ निकालब
उजरा औषधि वंशलोचन
कोनिञा सूप हकरा पथिया
मुदा खजुरिया बान्हमे बान्हल
हमर आ ओकर वर्तमान आ भविष्य
बकछुछरु खेलाइत हम आ भीखू
डोमासीक कातबला पोखरिक महारपर
थुथुन घोसियेने माँटिमे सुगरक झुण्ड
भीखूक भाए छथि आब सरकारी अधिकारी
दोसर भाए हॉस्पीटलक वार्डबॉय
आ भीखू एखनो डोमासीमे
जिबैत वर्तमानक संग भविष्यक ताकिमे
स्थिर ओहिठाम ठाढ़,
मुन्हारि साँझमे लीलीडाली हाथमे लेने
बजैत जे भाए बनल अछि अधिकारी
मुदा गाम छुटले छै बुझू
बियाहो पैघ घरमे ओकर भेल छै
दोसर भाए तँ गाम अबिते अछि
ओढ़ना पहिरना नीक मुदा काज वएह
हमरे नहि फुराइए करू की?
भविष्य तँ वैह बुझाइत अछि।
जे वर्णाश्रम नहि रहितैक तँ
बँसकरम करितै के?

सेप्टिक टैंक तँ गामो घरमे आबि गेल
से ओहूमे पाइ भेटैत अछि
आगाँ अहाँ अएलहुँ कहू?
मुँह झलकि गेलै भीखूक
ओहि मुन्हारि साँझमे
हम चुप्पे रही तावत्
ओहि झण्डी ठाढ़ गाछ लग
ठाढ़ गाछ किएक तँ छल कुकाठ
बाजि उठल भीखू मुदा काज तँ
काज तँ हमर ओ हाकिम भाए नहिए करत
मुदा अहाँले कहबै धरि अबस्से।
आ हम कहैत छी, नहि भीखू
हाकिम तँ पाइ लऽ कऽ काज कइये देत
मुदा काज अछि हॉस्पीटलक
पिता छथि भरती जतए भाए अहाँक छथि काज करैत।

कताक दिन भेलन्हि भरती भेना
मुदा नहि आइ काल्हि होइत
ऑपरेशनक तिथि अछि बढ़ेने जाइत
आ भीखूक मुँह झलकि उठल
मुन्हारि साँझमे।
हँ कहबामे जे होइत छै संतुष्टि
मदति देबामे जे होइत छै आत्मतृप्ति
ताहिसँ।

टुस्सा
सारिलबला काठक तँ गाछी विलुप्त
बबुरबन्ना बनल ओहि पारक खेत
कमलाक रेत
पघरियाक प्रहारक काजो नहि
सुखाएल जड़ि
आ एतए मड़ियाक सूक्ष्म प्रहार
सड़ेस कागचक बालु
जेना आक रेत।
कमरसारिक खट-खुटक ध्वनि
आ शानसँ दसौढ़ी चौकठिक आगाँ ठाढ़
मुदा आब ’सिम्पल’ आ ’एलीगेन्ट’
दसौढ़ी चौकठिक दोहराएब नहि पसिन्न
बदहा पहिरने लोक
आ ई गाछ बृच्छ
ठाढ़ मुदा हरियरी
जेना दुःखी पीड़ित
टुस्साक निकलब
जेना आगमन कोनो अभागक
चारू कात पसरल कमलाक रेत
आ ताहि बीच टुस्सा निकलब
मुदा संकेत प्रायः कोनो
आसक।

भुसना भथबाक
केबाल जेकाँ कठोर
मुदा पानि पड़लापर भथब
कोड़वाह ठाढ़ टिक्करक नीचाँमे
हलमहल कऽ कूटब माटि
सिलोहक बनल मुरुत ई मनुक्ख
रीझम आ अधघैली
सोबरना आकि बधना
पनिभरनीक माथपर राखल सिरहर
पुरहर सोझाँ बैसल वर-कन्या
छोलगढ़ियाक गुलाबीपाक
एहि बेर नहि जानि किएक रहल कचकुआह
गोढ़िआरी, धारक पलार
आ दूटा धारक हहाइत मोनियारक
भँसिआएल खेबाह
कहुना निकलि गेल मुदा
आगाँ बढ़िते जक
बढ़ब आकि धँसब
झाँखीक झझिया करत सुरक्षित हमर गाम
दाह-बोह आएल
किएक ई
एकार्णवा
दह
जलामय
कनबहकेँ झाँपि
पनिझाओ भेल सीमित मुदा तकरा बाद
ई नम्माधग्गी
बिड़इमे होइत मछहर
कच्छाछोप, हेलैत कबइ
काही घुमैत
कौआठुट्ठी गाछक फड़
कबइजल्लाक
खींचि फिरचइ पकड़ि जाल खिरबैत
टापी छापब, उजाहिमे उपलाइत माँछ
सहदसँ माछक शिकार
इछाइन चारू कात
आ ओतहि खापमे माँछक अंडा
फ्राइ
जीरा सेहो
थइरमे छबराक संग माँछ
अमच्छ डबरा, मेहनतिक अपव्यय
जोह धारक दिशाक
मुदा अबार धारकेँ मारि फेकैत
माँछ
घुट्ठी भरि पानिमे चाँछ
आ ओहिपर चढ़ब धारक विरुद्ध
चालि दैत ई माँछ

खेधा-पौटी नाहक माङीपर बैसि
खसबैत बसेर जाल
आ हम दोसर माङीपर बैसिखेबैत छी ओहि जालकेँ दिशा निर्दिष्ट भऽ
कन्हेर करैत
जालक चारूकात
ठकठकिया करैत
अनैत माँछकेँ जाल दिस
पलइ आ पिठकट
बेच दऽ कीनल माँछ
लावा-दुआ, ठेङी
धोबिया चिड़ै, मछगिद्दी
औकामे गूड़ी सभ उठा
अएलहुँ ऊपर
मखान उठबैत पेलनीसँ
गूड़ीसँ चोंइटा हटबैत

बाङक बङौरा
सुखाएल ई बङठी
औंटि कऽ निकालि बङोर
तुमब आ फाहाक पृथक होएब
धुनकीसँ धूनब
लारनिसँ ताँतिपर कऽ आघात
टकुरी कटैत
मड़िआयब छिन्नाकेँ
पागब सूत
१०
ग्फ्स कपड़ा
११
ननगिलाट पहिरने बूढ़ी
सोझाँ नन्हसुतमे मलकिनी
१२
कलबत्तू पइसा कऽ गाँथब आभूषण
किरमिची चानीक पानि चढ़ल
मुदा वैह ताम
१३
पाग नहि चाही हमरा मौड़
शंकुक आकारक पैघ,
कोढ़िलायुक्त पागक अग्रभागक पेंच नहि
१४
चिरतन, ठिकरी, लहेरिया आ जंगलाती छाप
पटोर, गुलबदना, नीलाम्बरी
सोइरीक नूआ
१५
कलफ लगा कए कड़गर कए
भेलासँ दऽ चेन्हासी
खुटिया मिरजइ ओछ
१६
तूरक फाहा, पोखरिया
लहेरिया, बदामी, चानपंखा
बेराएब आ सुइया पैसाएब
सिऐन अधलाह, गुलठिआइत तूर
१७
लखिया भेड़ जेकाँ आगाँ-आगाँ
बथनिञाक बथनाएब अबैत काल
आ खभाएब जाइत काल
बीसटा भेड़क लेहड़
एक सए भेड़क बाग
चारि-पाँच सए भेड़क गँहेड़
भेड़केँ खउरब
१८
पुरान लोहझाम
लोहङ्गरकेँ
भाथीमे पैसैत वायु
भाथी सालब आ प्रज्वलित करब अग्नि
कलम छेनी
चकरसानपर पिजबैत सरौता
कबिराहाक कनसीपर उठैत धुन
१९
हमर आकांक्षाक अग्नि
पृथ्वीसँ द्युलोक दिस जाइत
माता पृथ्वीक हृदएक आगि
द्यौ पिताश्री
पृथ्वीक पुत्रा वा भाए
आलोकदीप्त ई नीलवर्णक आकास
अरणिमन्थनसँ प्रकाशित ई पृथ्वी


छिलुआ पहलदार बासन
आघातसँ मठारब पित्तरि
कलगैञा लोटा
निरंजनीक दीप
जलधरी
दीयठिमे राखि दीप

टुमटाम गहना
गोबरियाव सोन
जोकठी आ दसकलम
चाँपकली पहिरने ओ
हलुमानी नातीक लेल
पथरौटी पहिरि
पवित्री जनउमे बान्हल
श्राद्धक काञ्चनपुरुष

कनसारी भुज्जा
दाबापर उझकुन ओहिपर राखल बासन
चुल्हाक पौरी
कूरामे धिपाओल बालु
भुजनाठीसँ लाड़ैत

मकइक मखानी
सोन्हगर आ झूर नीक स्वाद
मुदा आब अतिखाइन होइत
आँचब आ प्रज्वलित राखब
मुदा हम्हरब आगिकेँ
खोरनाठब मुदा
आगिक खसब पातक ढेरीपर
आ पसाही लागब

अदहन देल पानि आँच दए तारब
उसीनब कूटि कऽ
मुरहीक चाउर बनाएब
नोन-पानिसँ मोअब
कोड़ाइ
दालिक खोंइचा

बिनु जमल गुड़
छाल्हीक पातर ममुरी
परतपरसँ काछि कऽ निकालल मलीदा

तेबासि नीक
मुदा बसियानि
मोटगर भैसाठ
आ पातर तुर्री दही

कोइयासँ तेल निकालब
मोहब आ दऽ आएब तेलिहानी
तेलीकेँ दऽ बहतौनी
घानी लगाएब आ निकलब धेनुआर घानी
घानी निघरब
तेलहनक अवशेष खरी


उज्जर रंगक रेह
नोनथरा
कोठीसँ निकलल
पनारसँ चुबैत पानि
अवशिष्ट सिट्ठी ढेर नोनफर
काछल फेन खारीसँ खरिआ नोन

फेर अवशिष्ट पछाड़ी
दोसर खेपमे काही शोरा
आ पकवा नोन
तेसर खेप तेलहा शोरा
आ नीमक
अवशिष्ट जराठी
जराठी आ सिट्ठीक मिश्रण
बेचुआ
रौदमे सुखा कऽ जरुआ शोरा-आबी शोरा
कच्चा शोरा परिशुद्ध भऽ कलमी शोरा
नोन- रामरस
कम नोनगर- मधनोन

कटियामे मधु राखि
चिड़ै मारबा लेल नर-सर
नाल गुआमे पैसल
नरक उपरका सिर आ नीचाँ भारू
सरमे कमची सभ
पकड़बा लेल चिड़ै कम्पा
मन्तुर पढ़ि छत्ता लग जाएब
मधुर स्वरक करार सूगा
कंठ लग लाल दागी अमृत भेला सूगा
कर्कश बजरी सूगा
तुनकारी दऽ बिज्जीक शिकार

२०
कान रहित घैल- मोइट
इकरी
पानक जड़ि लग गारल खरही
आ ओहिपर ठाढ़ लत्ती
राड़ी घासक टुकड़ी
काइससँ बान्हल
सरपत घासक टुकड़ी
बन्हकासँ बान्हल पानक ढोल
मोरल पानकेँ सीकीसँ
बाँसक पातर शलाकासँ गाँथल
बेल निकलल शाखा कनार
इकरीसँ गछौठौनी
पानक लत्ती- छर्रा
गीरहसँ युक्त छर्राक भाग- बेल
लतीक छीपकेँ काटब
छपटा करब
जड़ि लगक चारि-पाँचटा पानक पात- घासन
ऊपर  चारि-पाँचटा पानक पात- कूट-खूट
ऊपर चारि-पाँचटा पानक पात- कचलेवारि
छीपपरक पात- मुड़वारि
पात तोड़बाकाल कूटक एक-दूटा पात किछु काल लेल छोड़ि देल
जड़िसँ छीप धरि दुपन्ना
सभटा पात लेवार
पानक कठोरता तज्जी
झलमा बीमारी भेने पान कड़ू भेल
फुट्टा बीमारी भेने पात गलल
पात गलि कऽ तुबब तेलगगरा बेमारी
पात सुखाएब झरकब बेमारी
बढ़ती बेमारी पातक अग्रभाग झरकब
पानक पातक फेरफार नहि भेने झरकब बेमारी
बहुती
बीस पात- कोरी
पचास- चौठैय्या
एक सए पात- आधा ढोली
दू सए- एक ढोली
सात ढोली- एक कनमा
अट्ठाइस ढोली- एक पौआ
छप्पन ढोली- आध सेर
एक सए बारह ढोली- एक लेसो
एक ढोलीसँ कम पात- भीड़ा
छोट भीड़ा- भीड़ी
अत्यन्त छोट भीड़ी- भिरौड़ी
पातमे बान्हल भीड़ी- पतौरा
भिरौड़ी-पतौरी
छुट्टा- डंटी सहित बिनु काटल पान
तबक- पानमे साटल पन्नी


२१
खील एक सालक खजूरक गाछ
नहि भेटत हमरा गाममे खजूरक गाछ
खीलकेँ गर्दनि लग छिललापर खिलकट्टी
पौ- तीन सालक रस चुअयबा योग्य गाछ
एक सालक ताड़क गाछ- खगड़ा तीन सालक जोता
डल्ली डंटी सहित पात ताड़ आ खजूरक
तारक डंटीबला डल्लीक भाग- डमखोरा आ पातबला- छाजा
उपरका भागसँ नव पातक अंकुर फुटैत छैक- बीड़ कलगी
गोभा खोआ बीड़क लगबला मोलाएम भाग
बीएड़ ओ ओकर चारूभाग पातक समूह- मौड़
ताड़-खजूरक गाछी- बगात
खजूरक बोन- खजुरबन्नी
डड़कसपर ओंङठल पासीक शरीर गाछ छिलबा काल
महालीपर कपड़ाक छनान मुँह बान्हने रहैत अछि
माटिक कटियामे ताड़ी पिबैत
सभसँ छोट नपना- गुड़की
दुन्ना गुड़की- अधचौठी
दुन्ना अधचौठी- घचक्का
चारि चौठी- घैली/ बेचाढ़ी
नाम आकृतिक घैली- दोकानी बम्मा
छेबब गहींर कटोरी जेकाँ छेबब गरदनिपर
फेर तेसरा दिनपर पातर-पातर परत पृथक करब- पहटब
छीलल भागक निचला भागमे जीहक आकृतिक बनाबटि- जिभिया
पसीखाना पी ऑफिस आकि पी.एन.कॉलेज
पासीक चिड़ै पकड़बाक हसेल जाल

२२
सूड़ी आ कलवार
माटिक पैघ तौला- माट
बाँसक दंडक अग्रभागमे ठोकल चाकर औजार- खड़ुआ
देग- तामक पैघ तौला
देगक ऊपर पेनीविहीन कोहा- डिमनी
डिमनीक ऊपर औन्हि कऽ राखल बासन औन्ह- तमिया औन्ह
औन्ह- चोंगर
डिंगरी- तामक तौला- एहिपर चोंगर औन्हल रहैत छैक।
कसौंझी- गुड़ आ महुआक मिश्रण
खूब पातर दोकानी दारू
दोकानीसँ कम पातर दारू
दोबारा- दुधियासँ मोट दारू
दोबारासँ मोट दारू- सौंफी/ सेबारा
कसमौर- सौंफीसँ कड़ा दारू
तारी आ दारू फेंटि कऽ झक्का
भट्ठी चलओनिहार भटबाह
भटबाहक मजदूर- गद्दीवान
२३
लहेरीक लहकम
पेमर-चपड़ामे पीयर रंगक पाउडर फेंटल
डर- चूड़ीक आरम्भिक स्वरूप
डरकेँ गोल करबा लेल काठक बेलनाकार औजार-कुन्द
चउँकी- चौखूट नग
फुकाठीसँ फूकब आगि
चूड़ी सभ सटि ने जाए से चिड़नीक प्रयोग होइत अछि
कटैया- तैयो सटि गेलापर खोलनीसँ पृथक् करब
पलसब- डऽरकेँ लोहाक खूरासँ चापट कएल जाइत अछि।
गोबब- गोबनासँ चूड़ीपर फूल बनाओल जाइत अछि।
नीलवर्णक चूड़ी- तीसीफूल
गूआमाला- लाहक डमरू आकृतिक वर-कनियाँकेँ पहिरएबाबला गहना
लट्टोपट्टो- लाहक धियापुता लेल खेलौना
तोरा- चूड़ी सभकेँ बान्हि बनाओल समूह
फूटल लहठीक टुकड़ी- कटैल

जोमक काठक धोबिया पाटपर पटकैत
खिरहरीक स्पर्शसँ कपड़ा
ठाढ़ गोरारीपर

ठेकपर लोहाकेँ राखि

कान्हमे बकुच्चा
गदहापर लादल लादी नमगर

गौँछा मुट्ठी भरि कपड़ा

लपेसब दग्गीयुक्त भागकेँ
गाड़ल ऐंठि कऽ आ जमा कएल अगोट

करघासँ उतरल कोरा
गोबरझार दऽ चमकाएब

२४
झलझल सालू
खासासँ पातर अद्धी मलमल
तीसीक डाँटक तिसिऔटा वस्त्र
पातर सूत- डेम्सी
भौजीक गोझनौट
दरजीक अनामिकाक अंगुरताना
पाञ्जरसँ कन्हा सेस्त
दुनू कन्हाक बीचक दूरी पुट
पएरक नीचाँक घेरा मोहरा
सरल रेखाक सिलाइ सुरेबी
टेढ़का रेखा- उरेबी
दरजीक बखिआयब
आ कोरपर देब चाँपा बखिआ
फाटल कपड़ा तानी-भरनी बुनाइ रफ्फू
फाटल कपड़ामे चिप्पी- चेफड़ी
नाम कपड़ाकेँ कोचिया कऽ चुनिआयब

-पहिरि साठा पाग

२५
वाद्य यंत्रकेँ चामसँ छारब
मृतप्राय आ मुइल माल- डाङर
मालक मुइल छोट बच्चा- गैना
अधेर भऽ मुइल माल- लाइट
मुइल मालक चाम- मुरदारी
मुइल गाइक चाम- गोइटा
मुइल महींसक चाम- भेंसोटा
उज्जर कएल चाम- चरकी
पीअर कएल चाम- साम्बर
मुइल मालसँ चाम खलब-स्थल- चमखल्ला
चमखल्ला धरि पशुकेँ लऽ जएबाक दंड- सङरैठा
छूरीसँ चामकेँ उपयुक्त स्थलपर काटब-बनछोलब
गाइक नाभि लग उज्जर दानायुक्त पदार्थ- गोरोचन
रोआँ उखाड़ि सीबि धोकरी बना आम महु बबूर बाँझीक छालकेँ कूटि पानिमे घोरि भरि देल
साधारण तारकाँटी
चाकर माथबला बोमा काँटी
गोल माथबला गुलमेख काँटी
छोट आकारक काँटी धन्नी
अर्धच्अन्द्राकार लमनचुसिया काँटी
जूताकेँ चमचम वा मोलाएम बनएबा लेल अंडी तेलक प्रयोग
बबूर शीशोक सारिल भागक टुकड़ा चाम
कटबाक ठेहाक रूपमे प्रयुक्त –पहटा
चाकर धारबला सीबाक औजार-तिजकरनी कटरनी
पातर कटरनी- कलौसिया
मोट तागक लेल कटरनी- वाल्टी
दू तरहक सिलाइ- साधारण एकहरा
-जंजीरा सिलाइ सूतक श्रृंखला
मोम रखबाक लेल प्रयुक्त बकरीक सिंघ- तिजमन
पएकर- जूतामे सुगमतासँ पएर पैसेबाक औजार
पिजएबाक लेल प्रयुक्त पाथर- लगौना
पिजएबाक लेल प्रयुक्त चामक टुकड़ी- चमौटी
ढोलक दुनू कातक मुँह- पूरा
चामक परितः बाँसक कमची- चपनी/ पत्ती
एक भाग खाली चाम- सुर
दोसर कातक चाम भीतरसँ गोल मसाला- गद्द/ बम
मृदंगमे सूतक डोरीक बदला चामक डोरी प्रयुक्त होइत अछि- बद्धी
बद्धीक नीचाँक काठक छोट-छोट गोल टुकड़ी- गुल्ली

छोट पूराबला मृदंग- मानरि
मानरिये सन दोसर- पखाउज
मानरिये सन दोसर- नाल
चाकर गोल कठरा दुनू दिस समान ब्यासक चामसँ छारल- डाङर
चारि आङुरक चाकर वृत्ताकार कठरापर चामसँ छारल- डफ
पैघ डफ- ढक्का
सनगोहिक चामसँ छारल डफ- खजुरी
डोरीक कम्पनसँ ध्वनि- गुमकी
अधगोला छोट माटिक खोलापर चामसँ छारल- डिगरी
डिगरीसँ पैघ वाद्य- जिल
जिलसँ पैघ- भठिया
भठियासँ पैघ- मादल
मादलसँ पैघ- ढाक
ताहूसँ पैघ- नगारा
ताहूसँ पैघ-डंका
छाँछक आकृतिक माटिक खोलापर छारल- तासा
पिपही आ ढोलक समूह- खुरदक
शहनाइ संग प्रयुक्त छोट नगारा- नौबति
छोट पूरासँ युक्त ढोलकक कठरा आकृतिक माटिक खोलपर छारल वाद्य- चानखोल
लोहारक भाथीपर चाम चढ़ाओल जाइत अछि- भाथी सालब

घी रखबा लेल चामक पात्र-कुप्पा

२६
मालि
फूलक बाड़ी- फुलहर
खेतकेँ जोति-कोड़ि सरंजाम करब- चउकिआएब
कोदारि द्वारा कचिमाटिकेँ पातर करब- थलिआयब
लोटैत गाछ- भुइयाँलोटान
गाछक पात सभक ऐंठि जएबाक क्रिया- कुकुरियाएब
फूलक रंग मलिन होएब- सुर्खी उतरब
मौलल फूलक स्वतः खसबाक क्रिया- तुअब
खुरचनिञा फूल- जेठसँ अगहन
कमलक धड़बला डंटी- मृणाल
कमलक धड़बला पात- पुरैनि
फऽड़- कमलगट्टा
कन्द- बिसाँढ़
रक्ताभ लाल रंगक प्रभेद- कोका
करबीर- लाल-बारहोमास
कामिनी- चैतसँ अषाढ़- सूक्ष्म थौका उज्जर एकहरा
कुमुदिनी- भेंटक प्रभेद
गुलाब- काँटयुक्त गछुली
थलकमल- स्थायी पैघ गछुली- आसिनसँ अगहन भोरमे, फुटबाक समए रंग उज्जर, प्रकाशमे लाल।
भेंट/ मलकोका- उज्जर- आसिन कातिकक रात्रि
बकायन-स्थायी विशाल गाछ, एकहरा उज्जर, कातिकसँ पूस
मधुरी- आलरंग, एकहरा,छोट गछुली, उनटल कटोरी सन, आलरंग, धनखेतीमे, कातिक-अगहनक रात्रिकाल
मालती- स्थायी लत्ती, छोट एकहरा, हल्का उज्जर फागुन चैत
लवङलता- पातरपातबला अस्थायी, लौंगसदृश लाल रंगक फूल, फागुन-चैत
संझा- अस्थायी, एकहरा, लाल पीयर,उज्जर, चैतसँ आसिन
फुलबारीक घेरा- जैंत, नागफेनी,बगेयाक काँट, पसीझ (दुधिया आ मुठिया), फरहद, सिनुआरि, बालछड़ी
औषढिबला- गनि, गेठबन, गेठिया, धीकुमारि, पथलचूड़, पुदीना, मन्तरा
मएनापात- सिन्दूर पिठार दागबला
दग्गीविहीन- ढाककेराक छोट गाछ- पौंछ
थम्हक परतदार अनेक छाल सभकेँ – बखोड़/ बखोड़ा/ बखोड़ैया
प्रत्येक बखोड़ा- डपोर
डपोर सुखलापर छीलि कऽ ओकर उपरका भागसँ बनल ताग सदृश वस्तु- पटेर
मालि क देवस्थानमे चढ़एबाक वस्तु विशेष- कोढ़िला (घास)
रोगाह कोढ़िलाक भीतरी भागक ललौन दग्गी- रकसी
फूलक गाछक अतिरिक्त भागकेँ कटबाक छोट कैंची- गुलकैंची
लोहक बाल्टी जकर अग्रभागमे छिद्रयुक्त टोंटी पानि पटएबाक लेल- झाँझ
कपड़ा मोड़ि बनाओल फूल रखबाक धोकरी- फुलझोड़ा
माला गँथबाक लेल खढ़क पातर भागकेँ मोड़ि बनाओल औजार- सीकी
कोढ़िलाकेँ पानिसँ कटबाक लेल मालीक लोहक दाँतयुक्त औजार- कचिया हाँसू
फूल-मालाकेँ बैजन्त्री, केरा वा अंडीपातमे लपेटि पटेरसँ बान्हब- पतौड़ा
ताग- पटेरमे फूलसँ निर्मित माला- ठर्रा माला
ठर्रा मालाक मध्यवर्ती भागमे कएल मोट गँथाइ- कंठा
कंठा लग लटकैत फूल समूह- फुदना
पटेरमे दूर-दूरपर बान्हल फूलक माला- हथफनुआँ
हथफनुआँक दूटा फूलक बीचक दूरी- फानी
फूलक डंटीकेँ गँथलासँ – गिरौआ माला
चारि फूल गिरौआ आ एकटा फूल ठर्रा गँथलापर- पचफुल्ली माला
पचफुल्लीक पाँच फूलक समूह- छल्ला
घन कऽ गाँथल माला- गजरा
हाथमे पहिरबाक गजरा- कग्गन
सिउंथ परक गजरा- मङटीका
गरदनिमे पहिरबाक हेतु प्रयुक्त गजरा- हँसुली, कानमे पहिरबाक छोट सन माला- कननडोला
मुसलमान लोकनिक माला- कुर्सी
मुसलमान लोकनिक बिआहमे प्रयुक्त माला- सेहला
सेहलामे माथपर तीनटा, मूहक आगू चारि-पाँचटा लड़ आ दुनू हाथ ओ पीठकेँ संबद्ध करैत एकटा माला। आगू दिस लटकैत लड़- घुंघरु
कोढ़िला- कातिकसँ माघ धरि काटि धड़क मोट भागकेँ सुखा कऽ एकत्र- सुखलाक बाद उपरका भाग केश सदृश वस्तु रोआंकेँ साफ कएल जाइत अछि। धड़केँ अनेक खण्ड- टोनी/ गुल्ली गुल्लीकेँ परितः खण्डित कएलासँ बनल मलिछौन परत- खोइया/ आकठ
गद्दाबला पातर परत- बीड़
कतरलाक बाद गुल्लीक पातर अवशेष- हट्ठी/ हरैया

कोढ़िलाक कागचकेँ बेलनाकार मोड़ि अनेक खण्ड कएलासँ अत्यन्त कम चाकर टुकड़ीक समूहसँ बनल गोलाकार वस्तु- थोपा/ गेन
कोढ़िलाक कागचसँ बनल देवस्थानमे चढ़एबाक छतरीक आकृतिक वस्तु- मौड़
छोट मौड़- गेरुली
मौड़मे लगएबाक कोढ़िलाक कागचक दू आङुर चाकर ओ छओ आङुर नाम युगल खण्डकेँ परस्पर मध्यभागमे सम्बद्ध कएलापर बनल वस्तु- कचनारी
तमुरिया- ताम्बूल
पान पतैली बेल पबड़ा गहूम खाइके मोन होअए तँ जाउ झखड़ा
पतैली गामक पान
कोढ़िलाक पागमे
कोकटीक तौनी
सालमसाही पनही
पटमासी सिन्दूर
रिट्ठा-रिट्ठी पहिरा कऽ पोताकेँ देखथु
डराडोरि
डँड़कस
तमघैल
कोढ़िलाक पाग
अत्यन्त मोट सूतसँ निर्मित कपड़ा- ननगिलाट
तीसीक छालसँ निर्मित वस्त्र- तिसिऔटा
रेशमी वस्त्रक प्रभेद- अद्धी, तसर, बनात, बाफदा
वस्त्र बिनबा काल उचित संख्यामे तानी वा भरनी नहि देलासँ रिक्त स्थान- उचिला
आरा काटक अनुरूप वस्त्रक सिलाइ- सुरेबी
खड़ा काटक अनुरूप वस्त्रक सिलाइ- उरेबी






२७
गरजैत मेघ रौद्र
मेघमे विद्युत
वृत्रहन्ता इन्द्र चीरैत छथि मेघ
कवष ऐलूषक ऋक्
शूद्र कवि हमर
विद्युत् प्रकाशसँ प्रकाशित मेघक शक्तिपात्
शरीरक मध्य हजारक-हजार धार
रक्तक प्रवाहक साँपसन टेढ़-मेढ़ चालि
हमर मोन दौगि रहल
एहि अन्तर्मनक धारक बीच
ओहि बहिर्जगतक विद्युतसँ तीव्र
चतुष्पात् पुरुष वा ब्रह्म
मुदा एकपाद ई जगत्
अन्तर्मनक प्रचोदयिता
आसुरी वृत्र
आ राक्षसी पणि
शारीरिक धार
संचार तन्त्र
चलू समुद्र दिस
हमर नाड़ीतंत्र आ एकर
लहरिमे डूमैत-उगैत
अपन भोगल यथार्थसँ
बहार कएलहुँ मधु 
आहुति देबा लेल ओहि समुद्रमे
आ तखने शरीरक नदी-धार
लहरिमे डुमैत करैत अछि आनन्दित
जागरित मोनसँ निकसैत वाणी
पीपड़क पातक नाड़ीतंत्र सन
इला-सरस्वती आ भारती छथि
विद्युत् बाल लेल भोजनक इन्तजाम करैत
ज्योतिक हम साधक
सन्दीपनकूट हुअए लावण्यमय
सहस्रशाख विद्युत्
हिरण्यमयी
सहस्रजित्
अजस्र
अन्तर्मुखी
ऋतं बृहत्

२८
नाराशंसी

आ बीतल कैक दिन
छठिहारी छठम दिन
कविक कविताक छन्दक रससँ उगडुम करैत

आ डराएल विश्वदेव जे
पद्यक रस जे झझाएत तँ
पसरि जाएत सगर विश्वमे
गायत्री नाराशंसीक संग
से ओ
कविक कविताकेँ छन्दक रसमे राखि दैत छथि
बलि दऽ दैत छथि
कविक कविताक छन्दक रसक
आ गबैत छथि नाराशंसी।


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