बाङक बङौरा


१.बेशी छुट्टी कम इसकूल

बेशी छुट्टी कम इसकूल
खेल-धूपमे आरि-धूरपर
रौदे-बसाते घूमी खूब
मम्मी-पापा बाबी-बाबा
ताकि-ताकि कऽ थाकि-थाकि कऽ
बाड़ी-झाड़ी कल्लम गाछी
मेला ठेला गामे-गाम
भरि दिन भागा-भागी पाछू
साँझ पड़ैत घर सूती खूब
बेशी छुट्टी कम इसकूल

बेंट पकड़ने छड़ी घुमाबथि
मास्टर साहेब बड्ड डराबथि
मोन बेकल नहि
भय भागल अछि
छड़ी-बेंत सभ फेकथि दूर
बेशी छुट्टी कम इसकूल

भरि-भरि दिन चित्र लिखि टांगी
कड़ची-बत्तीक घर बनाबी
कनियाँ-पुतराकेँ घुमाबी
सपना देखी खुब्बे-खूब
बेशी छुट्टी कम इसकूल

बोने-बोन बिसरब रस्ता तँ
वनसप्तो घर घुराबै छथि
इसकूलमे गलती केने मुदा
मास्टर साहेब मारै छथि
छड़ी-बेंत सपनाइत छी
कड़ची-बेंतक छड़ी बनाबी
कड़ची-बत्तीक घर बड़ू
करचीक कलमसँ लिखना लिखी
चित्र लिखि टांगी सपना खूब
बेशी छुट्टी कम इसकूल



२.कोनो सजाए नहि
बदमस्ती हम खूब करी
आ हल्ला घरमे सेहो
बस्तुजात फेकी एम्हर
ओम्हर लोटी धूरा-गर्दामे
कादो-कदवामे लोटाइ
आ छप-छप पानिमे भागी
मुदा सजाए कोनो नहि भेटए
निअम एहेन बनाबी

रंग लगाबी कपड़ा-लत्तामे
हाथ-पएरमे सेहो
मम्मी-पापा भागि-भागि
पकड़ए चाहथि नहि पकड़ाइ
आस-पड़ोसी करथि शिकाइत
पापा-मम्मी नहि मानथि
खूब सुनाबी खूब बनाबी
मुदा सजाए भेटए नहि

द्वेष मुदा नहि राखी ककरोसँ
मुदा करी खूब बदमस्ती
धार जेना बहैए आगू दिस
हमहूँ बढ़िते जाइ छी
भेक जेना भदबरियामे
टर्र-टर्र कऽ गीत गबैए
हम गाबी भरि साल
मुदा सजाए भेटए नहि

पंक्ति तोड़ि नवका पाँतीमे
सभ बच्चा जे जाए
पुरना पाँतिक छोटका बड़का
अंतर तखन मेटाएत
जे देखत तँ देत सजाए
मुदा तखन तँ मैय्या
टूटत पाँति नव बनत कोना
जे देब अहाँ सजाए


३.बरखा भीजी
बरखा मासक बाते आर
घूमि-फीरि कऽ नाची खूब
बाबी संगे भीजी खूब
आँचरमे भीतर हाथ-पएर घुमाबी
बाबू नहि भीजथि बाबी सोचथि
लोक देखथि तँ हँसथि खूब

तखन भीजि कूदी हम भागी खूब
एकटा पैघ आएल अछार
बरखा मासक बाते आर
पनिसोखामे घूमी-फिरी
सात रंगक वस्त्र पहिरि कऽ
बुलबुला उड़ाबी नभमे ऊपर
ओहिमे सेहो सतरंग बनए
खेतमे देखी बड़द घुमैत
बीआ-बालि लऽ सभ खेत जाइत
पानि-बिहारिक आम सभ खसए कलममे
बीछि आनी भीजि-भीज

तरतड़ा देलक ई बरखा आब
बरखा मासक बाते आर

ऋजु घरैया आ वक्र वनैय्या
दुनू मिलथि एहि बरखा मास

आगत आबथि
जाथि अनागत
बरखा मासक गर्भवती अकास
सिहकल बसात बरखासँ भीजल
आएल जाड़ अछि आएल जाड़

ब्रखा मासक बाते आर

अगिलकण्ठकेँ शीतल करए
खेत-पथार भऽ जाए सेहो
खटबताह भऽ जाएब हम सभ
जे नहि होएत बरखा एहि बेर
आली-पाली घूमी-फिरी
नहि कोनो रोक-टोक एहि बेर
आएल बरखा घूमब-फीरब

उनचासो बसात बहत नहि चिन्ता
नहि छी हम कुम्हड़क बतिया
हृष्ट-पुष्ट भऽ जाएब फेर


४.भरि दिन खेली-धूपी
खूप खेलाइ
खूब धुपाइ
कोनो सबक नहि
कोनो टोका-टोकी नहि
बनि कौटंग एम्हर घूमी हँसाबी
लोक हँसथि हमहूँ हँसी
चलाचली होएत एकरे
आ राति-बिराति घर घूरी

५.लवनचूश चूसी भरि दिन
भरि दिन चूसी लवनचूश
मम्मी-पापा कहथि चूसैले
कुरकुड़ा कऽ नहि खाउ
मुदा चूसि-चूसि थाकल छी
कुरकुड़ाइत लवनचूश व्याकुल छी

मम्मी टोकथि पापा टोकथि
दाँतमे लागत चुट्टी
मुदा केओ टोकथि नहि मानी
लवनचूश हम फाँकी
कुरकुड़ खाइ चूसि अघाइ
हुअए एहन सभ दिन
लवनचूश चूसी भरि दिन

६.जे मोन भावै से करब
माटिक घर आकि घर बालूक
चित्र कागचपर आकि रौद चली
माए सभ काजपर सबाशी दैथि
घिरनी उड़ाबी चित्रपतङ्ग उड़ाबी

७.सभ दिन बर्थडे मनाबी
दोस यार सभ आबथि
खूब मचाबथि हल्ला


८.बानर
बानर घूमि रहल अछि
हमरा लगैए डर यौ
डराउ बानर केँ
लऽ जाउ दूर यौ

९.दोकानसँ चिप्स मँगनीमे आनू
जतेक मोन लऽ जाउ
चिप्स आलूक अहाँ
मँगनी सभटा खाउ

१०.खूब खेलाउ कमप्यूटर खेल
नहि रोकू-टोकू हमरा
खूब खेलाउ कमप्यूटर खेल

११.नीक चित्र बनाउ छापू

१२.आउ खेलाउ कनियाँ पुतरा

१३.बरफ खाउ जाड़मे
१४.रातिमे अबेर धरि जागू भोर उठू देरीसँ

१५
कारी मेघमे घोड़ा चढ़ि
सुरुज जेकाँ बरहम घूमै छथि
लाल धोती पहिरि घनगर मोंछ लेने पहिरने पाग
फूलबला कुर्ता पहिरि कारी-मेघ एहि ब्रह्माण्ड बिच
सुक-सुरुज सन घूमि रहल बरहम चारू दिस
पिपरक गाछतर

सरस्वती मेधा
सरस्वती हृदए निश्छल करू
काव्य नृत्य सङ्गीत कलामे
वीणा पुस्तक माला धारण

बाजू मैथिली
पढ़ू मैथिली
मातृभाषा प्रेम धरू
आरोह-अवरोहक सम्बल
कोमल-कठोर पदद्वय
मैथिलीक शरीरक
आधार बनू दृढ़
सुन्दर
मोनसँ स्मरण करू वचनसँ वन्दन
लोकहित जाहि मध्य एकर
अहर्निश काज करू तकर
नहि आत्म प्रशंसा
नहि निज सफलता
मैथिलीक उत्थान लेल
अन्हार गह्वरक यात्रा
अन्हार गुज्ज बोनमे
निज सख छोड़ि चलू यौ

हम्मर माए सुन्दर कुशल
दूध पियाबथि रगड़ि नहाबथि
खेनाइ खुआ पठबथि स्कूल
बससँ आनथि साइकिल चलबी
पाछू-पाछू असबार रहथि
पार्क घुबाथि गीत सुनाबथि
कोरामे लऽ सड़क पार कराबथि
पढ़बथि दिबरी जरा कऽ
माए हमर मृदुल


अमृत पुत्र
हम अमृत पुत्री
कृत संकल्पित
कीर्ति दहोदिश सत्यक मनसिसँ कष्ट समुद्र नहि भारी
स्वीकृत कार्य नहि छोड़ब
दीन दुखीक दुख मुक्ति
सेवा शक्तिसँ नहि छोड़ब


हे नाह चल आगाँ
ई किरण चन्द्रमा
दोसर- ई नाह चल आगाँ
ई आकाशमे गंगा
ओ उकापतङ्ग अछि सोझाँ
दोसर- चल नाद चल आगाँ
सागरकेँ छू कऽ तूँ
ई खेत पोखरिमे औ
दोसर- चल नाद चल आगाँ



ध्येय पथिक साधक
कार्यपथ साधय

चन्द्रमा तरेगण कतए रहै छी यौ
छोट पैघ
होइत रहै छी यौ
चन्द्रमा: छोट पैघ नै हम
ओहने छी यौ
सूर्य तरेगणक रोशनी
खेला करैए यौ


कुमार्ग असत्य दर्प गर्व
नै मानू दैन्य शोक

पद च्दृढ़ राखि
जीवन देबाले
मार्गदर्शक देशरक्षक
शत्रुनाशक
पद-पद मिला कऽ सोत्साह
पएर हाथ आँखि सभ
कन्दुकक खेल मध्य


चलू सभ मीलि बनाबी हवाइ जहाज
कागचक पनिया जहाज
उड़त बीच अकास आ चलत पानिक मध्य
जे उड़त अकाश मुदा से डूमत पानिक मध्य
जे डूमत पानिक मध्य से नहि उड़ि सकत अकास
वृक्षक ऊपर घरक सेहो


वाटिका मध्य फूल बीछि
माला बनाएब सभ मिलि यौ


किए कनै छी
अहाँ बाउ यै

सूर्य उगै अछि
चन्द्र डुमै अछि
पसरल सगर प्रकाश
हबा बहै अछि
फूल फुलै अछि
निन्न गेल अछि भागि
काज मध्य अछि जुमल सभ
लऽ नव उल्लास
पथिक चलल सभ अपन लक्ष्यपर
आंगन मध्य जनीजाति
झाड़-बुहार नुपुरक ध्वनि बिच
बच्चा सभ अछि खेलाइत

मेघ बरसि गेल
कृषक प्रसन्न
बीआ बाउग
हर नहि कामए

स्वागतम
बिना भेदक बिना रंगक
स्थली अछि ई हमर
जतए कोनो ने कोनो
ने कोनो दर्प ने गर्व
ने कुमार्ग


ने पीबू मादक वस्तु
ने दुर्व्यसन कोनो
ने समएक अपव्यय व्यर्थ
सभ काज करू समये

कुकुड़ भोँ-भोँ- घोटक
आ बिलाड़िक बोल
चिड़ै चुनमुनी


भोर उठै छी
पाठ करै छी
स्कूल जाइ छी आबै छी

अ आ इ
अं अः
गाबी नाची


हम धीर
हम वीर
हम शीलवान
सदिखन
पड़त कतेको भीर
तैयो हटब नहि

अन्तर्यामी नन्द तनिक नर-सखा पार्थ
आ भगवती सरस्वतीक वक्ता ब्यास
हिनका सभकेँ कए प्रणाम मन आर्त
करू महाभारतक पाठ
करू आसुरी शक्तिक नाश
आ भेने से अन्तःकरणपर विजय समर्थ
छलाह उग्रश्रवा जे लोमहर्षणक पुत्र
पौराणिक बड़ श्रेष्ठ

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