जलोदीप


चौबटिया सड़क नाटक


सूत्रधार: आऊ, आऊ। एहि चौबटिया नाटक, सड़क नाटक देखबाले आऊ।
(सूत्रधार लोक सभ दिस तकै छथि| हमर कलाकार सभ गप-शप करैत हल्ला जेकाँ करैत छथि।)
भीड़सँ आएल पुरुष कलाकार: (कलाकार सभक गोलसँ बहार भऽ निकलैत)- की हौ। की सभ बाजि रहल छह हौ। की छिऐ ?
सूत्रधार: सभ जुनि कऽ घेरा बना लिअ। मैथिली चौबटिया नाटकले घेरा बना कऽ ठाढ़ भऽ जाऊ। चोटगर नाटक हएत।
भीड़सँ निकलि कऽ आएल दोसर महिला कलाकार: चल रे चल। एकरा सभक मैथिली नाटक हेबऽ दही। नाटक देखलासँ भोजन चलतौ रौ।
सूत्रधार: नै यै दाइ। भुखलेबला लेल ई नाटक छै। पेटक भूख, मोनक भूख आ बोलीक भूख।
महिला कलाकार: से छै। तखन आबै जाइ जो।
सूत्रधार: आबै जाउ, आबै जाउ। आइ हएत बच्चा, किशोर, युवा, प्रौढ़ आ बूढ़क लेल नाटक। स्त्री-पुरुषक लेल नाटक। चिड़ै-चुनमुनी लेल नाटक, गाछ-बृच्छ लेल नाटक, हबा-बसात लेल नाटक। सूर्य-चन्द्र-तरेगण लेल नाटक। मूर्त-अमूर्त लेल नाटक। देश लेल नाटक। निन्न आ सपना लेल नाटक।
(महिला सूत्रधार बिच्चहिमे आबि जाइ छथि। भीड़सँ आएल वएह महिला कलाकार महिला सूत्रधार बनि सकै छथि।)
महिला सूत्रधार: हे। सोझे कहू ने जे ककरा लेल ई नाटक नै छै। एना पैघ-पैघ गप किए दऽ रहल छी।
सूत्रधार: कोनो नाम छुटि गेलै की ?
महिला सूत्रधार: यएह लिअ। सेहो हमहीं कहू। आब ताम-झाम शुरू करू आ देखाऊ जे की विस्तार लेने अछि ई नाटक।
सूत्रधार: बेस तँ शुरू करू।


(कलाकार सभ एक दोसरामे मिज्झड़ भऽ एक-एकटा फराक पाँती बनबैत छथि। छोट, किशोर, युवा आ बूढ़क पाँती। स्त्री-पुरुषक पाँती। चिड़ै-चुनमुनी जेकाँ छोट बौआ आ छोट बुच्ची बजैत अछि। किशोर सभ हाथमे गाछ-बृच्छक आ हबा-बसातक फोटो लऽ लैत अछि। दुनू युवा स्त्री-पुरुष सूर्य-चन्द्र-तरेगणक फोटो लेने अछि तँ बूढ़ आ बुढ़ी भूत-प्रेत, भगवान आ स्वप्नक फोटो हाथमे लऽ लैत छथि।)

१ छोट बौआ: हम ओम। हम चिड़ै।
२ छोट बुच्ची: हम आस्था। हम चुनमुनी। हा हा (हँसैत)।
३ किशोर बौआ: हम जयन्त। हम गाछ।
४ किशोर बुच्ची: हम अपाला। हम बृच्छ। हेँ हेँ (हँसैत)।
५ युवा: हम विजय। हम सूर्य तरेगण।
६ युवती: हम विजया। हम चन्द्र माने चन्दा। खी-खी (हँसैत)।
७ वृद्ध: (थड़थड़ाइत) हम नेकलाल। हम भूत-प्रेत-राकश...।
८ वृद्धा: हम रामवती। हम स्वप्न माने कल्पना। हम...हम...हम...।
(कल्पनाक भाव-भंगिमा तीन बेर करैत छथि।)
सूत्रधार: अहाँ सभक काज की ?
महिला सूत्रधार: अहाँ सभक काज की ?
(आब छोट बौआकेँ –ओमकेँ- १ छोट बुच्ची- आस्थाकेँ- २ एना ८ धरि कहब।)

१ सँ ८ (संगे-संग): हम सभ कोनो काजकेँ ढंगसँ कऽ देब, कहि कऽ तँ देखू।





















सूत्रधार: आइ एकटा संस्कृत साहित्यक प्रसिद्ध कथापर आधारित नाटक देखा रहल छी। चोटगर कथा अछि। बच्चा आ पैघ सभक लेल। देखू ई भिखमंगा कतऽ सँ आबि रहल अछि।

दृश्य १
(गाममे घुमैत)
भिखमंगा: गरीबकेँ किछु दिअ। पुरान कपड़ा, रुपैआ, पैसा। किछुओ दिअ।
बूढ़ी: लिअ ई कपड़ा। पुरान छै मुदा जाड़मे बड्ड गरम रहै छै। ई अन्न सेहो।
नबका कमौआ: लिअ ई पैसा। किछु कीनि लेब।
(भिखमंगा सूत्रधारक बगलसँ होइत कपड़ाक धोधरिमे अन्न रखैत अछि। पाइ गनैत अछि। फेर दोसर दिस अपन घरक खाटपर बैसैत अछि। एकटा चुकड़ीमे पाइ रखैत अछि, फेर गनैत अछि।)
भिखमंगा: (मोने-मोन) आब तँ ढेर रास पाइ भऽ गेल। मोन अछि जे कमलाक भगता बनि जनकपुर जाइ। भगवान से दिन देखेलन्हि।

दृश्य २

भिखमंगा: (बोगलीमे पाइक चुकड़ी लेने आगाँ जाइत- भोरुका समए)

      चलू चलू यौ
जनकपुरमे कमलाक भगता
करू करू यै
कमला माइ करू हमर उद्धार
चलू चलू यौ जनकपुर
भगता बनि कमलाक

(सोझाँ बालुसँभरल कमलाक तट। भिखमंगा सोचैत अछि।)
-अहा। की विस्तार अछि कमलाक। मुदा एतेक भोरमे कियो एतए नहि अछि। चलू पाइक चुकड़ी कातमे राखि डूम दऽ आबी।
(पाइक चुकड़ी नीचाँ रखैत अछि आ नहाइ लेल बिदा होइत अछि।)
(मोने-मोन सोचैत)- मुदा कियो जे देखि जाएत आ ई पाइ लऽ लेत तखन? एकरा बालुमे नुका दैत छिऐक।
(बालु कोड़ि कऽ चुकड़ी नुकबैत अछि।)
(फेर मोने-मोन सोचैत) मुदा जे कियो ई देखि जाएत तखन? मुदा देखत कोना आब। तेना कऽ नुका देने छिऐक जे आब हमरो नै भेटत।

(फेर सोचैत घुरि अबैत अछि।)
मुदा हम जे नहा कऽ आएब तँ कतऽ ई पाइ गाड़ल अछि से हमरो कोना बूझऽ मे आएत। ठीक छै।
(कोड़लाहा स्थानपर अबैत अछि।)
एतऽ शिवलिंग बना दै छिऐ। ( कोड़लाहा स्थलपर पएर रखैत अछि आ पएरक चारू कात बालु राखए लगैत अछि। चारू कातसँ बालु भरि गेलाक बाद आस्तेसँ पएर हटा लैत अछि आ नीक-नहाँति शिवलिंग बना दैत अछि। फेर निश्चिन्त मोनसँ कमला-स्नानक लेल बिदा भऽ जाइत अछि। एम्हर ओ धार दिस बिदा होइत छथि आ ओम्हर दूरसँ किछु आर स्नानार्थी, पुरुष हाथमे धोती आ महिला हाथमे नुआ लेने, अबैत दृष्टिगोचर होइत छथि।)
(मोने-मोन सोचैत) नीके भेल जे फुरा गेल। कएक सालक कमाइक छी ई पैसा। ई लोक सभ आब स्नान करबा लेल आबि रहल अछि। ने जानि ककर मोनमे खोट हेतै आ ककर मोनमे नै।

(नहाइ लेल मंचसँ नीचाँ धारमे फाँगि जाइत अछि।)
पुरुष स्नानार्थी - (अपन कपड़ा लत्ता राखै अए) चली कमलामे डूम दऽ आबी।
स्त्री स्नानार्थी- (भिखमंगा द्वारा बनाओल शिवलिंग दिस इशारा करैत) हे देखियौ ओ शिवलिंग। लागैए एतऽ स्नान करबाक पहिने शिवलिंग बनेबाक विधान छै।
पुरुष स्नानार्थी- अपना सभ दिस, गंगा कातमे तँ एहेन कोनो परम्परा नै छै।
स्त्री स्नानार्थी- एत्तऽ मुदा छै। आ भोलाबाबाक स्थापना कऽ डूम लै मे हर्जे की।
पुरुष स्नानार्थी- हँ से तँ ठीके।
( दुनू गोटे एक-एकटा शिवलिंगक स्थापनामे लागि जाइत छथि। पएरक चारूकात बालु चढ़बऽ लगै छथि। तावत् आनो लोक सभ आबि कऽ किछु पूछऽ लगै छथि आ अच्छा-अच्छा कहि ओहो सभ एक-एकटा शिव लिंगक स्थापनामे अपन-अपन पएरक चारू कात बालु चढ़बए लगै छथि। कनिये कालमे मंचपर शिवलिंगे-शिवलिंगे भरि जाइत अछि। मंचपर हर-हर महादेवक स्वरसँ अनघोल भऽ जाइए। )
भिखमंगा: (नहा कऽ निकलैत) देखू, जखन आएल रही तँ एकोटा लोक नहि छल आ आब देखू कतेक भीड़ भऽ गेल। हमरा की। जोगी छी, बहैत पानि सन। ई अंगवस्त्र रस्तेमे सुखा जाएत। जए माँ कमलेश्वरी। कमलाक भगता बनि चली आब जनकपुर। मुदा ओ चुकड़ी तँ लऽ ली।
(अपन बनाओल शिवलिंग ताकऽ लगैत अछि। मुदा चारू कात शिवलिंगे-शिवलिंग। एक दूटा शिवलिंगकेँ भखराबैत अछि मुदा ओहि नीचाँसँ किछु नहि बहराइत अछि।)
(भिखमंगा माथपर हाथ राखि मंचपर बैसि जाइत अछि आ आस्ते-आस्ते मंचपरसँ प्रकाश विलीन भऽ जाइत अछि।)
(पटाक्षेप)






जलोदीप


चारू कात जलामय। एकटा बच्चा कोहुना कऽ बाढ़िसँ बाहर निकलैत अछि। लोक सभ ओकरा दिस दौगल अबैत अछि।
बच्चा: न। हम तँ ठीके छी। मुदा हम्मर...
(अन्हार पसरि जाइत अछि।)


दृश्य १

(छहर दिससँ लोक सभ आबि रहल अछि। अनघोल भेल अछि।)

पहिल लोक: हे बाइस फीट पानि आबि रहल अछि। घण्टा भरिमे सभटा डूमि जाएत। चौकीपर चौकी गेटह। बड़का बच्चाक छतपर बच्चा सभकेँ दऽ आबह।
दोसर लोक: बाइस फीट तँ नै मुदा हिलकोरक अबाज अबैत सुनने आ देखने रहिऐ। झझा देलकै, छहरक ऊपरसँ पानि खसलै। झंझारपुर दिसुका बान्हपर जोर रहै। मुदा मारवाड़ी सभ झंझारपुर दिसुका पुबरिया बान्ह बचेबाक लेल सुनै छिऐ जे अप्पन सभक दिसुका पछबरिया बान्ह तोड़बा देलकै।
पहिल लोक: सुनै छिऐ से सत्य नहियो भऽ सकै छै। आ एतेक टा बान्ह कोना तोड़ल हेतै।
तेसर लोक: से की कहै छी। गोपलखाक सोझाँमे दू छह मात्र मारबाक देरी रहै।पानिक जोर तँ अहू दिस रहै। भने ओतहि टुटलै। अपना गामक सोझाँ जे टुटितै तँ गामे भँसि जइतै।
दोसर लोक: आब से बहस करबाक समए नै अछि। अपन-अपन होस धरै जाऊ। पहिने बच्चा सभकेँ बचाऊ।


  

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